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नशे के खिलाफ एकजुट हुआ जमशेदपुर: उपायुक्त ने दिखाई हरी झंडी, मानव श्रृंखला बनाकर दिया नशामुक्त समाज का संदेश

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जमशेदपुर: नशे की लत आज हमारी युवा पीढ़ी को खोखला कर रही है, और इसके खिलाफ सिर्फ कानून के भरोसे नहीं बैठा जा सकता। इसी सोच के साथ पूर्वी सिंहभूम (जमशेदपुर) जिला प्रशासन ने मादक पदार्थों के खिलाफ चलाए जा रहे राज्यव्यापी जागरूकता अभियान का एक शानदार और बेहद असरदार समापन किया। 10 जून से शुरू हुआ यह अभियान शनिवार को एक विशाल मानव श्रृंखला और जागरूकता रैली के साथ संपन्न हुआ।

समाहरणालय से लेकर साकची गोलचक्कर तक बनी इस मानव श्रृंखला को खुद उपायुक्त (डीसी) ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस दौरान पूरा रास्ता “नशे को ना, जिंदगी को हाँ” के नारों और तख्तियों से पटा नजर आया।

युवाओं और आम जनता ने मिलाया हाथ

इस अभियान की सबसे खूबसूरत तस्वीर यह रही कि इसमें सिर्फ प्रशासनिक अमला ही नहीं, बल्कि शहर का हर वर्ग शामिल हुआ।

  • प्रशासनिक नेतृत्व: उपायुक्त के साथ उप विकास आयुक्त (डीडीसी), अपर उपायुक्त और जिला प्रशासन के तमाम बड़े अधिकारियों व कर्मचारियों ने सड़क पर उतरकर मोर्चा संभाला।
  • जनभागीदारी: बड़ी संख्या में स्कूली छात्र-छात्राएं, कॉलेज के युवा, सामाजिक संस्थाओं (NGOs) के प्रतिनिधि और आम नागरिक इस मुहिम का हिस्सा बने।

‘नशा मुक्त’ समाज के लिए ली गई शपथ

समापन के मौके पर उपायुक्त ने वहां मौजूद सभी लोगों और युवाओं को जिंदगी में कभी भी नशा न करने और दूसरों को भी इसके प्रति सचेत करने की शपथ दिलाई।

उपायुक्त ने अपने संबोधन में कहा: “मादक पदार्थों की रोकथाम सिर्फ कड़े कानून बनाने से मुमकिन नहीं है। इसके लिए पूरे समाज को आगे आना होगा। हमारी युवा शक्ति का देश और समाज के निर्माण में बहुत बड़ा योगदान है। युवाओं को नशे के अंधेरे से दूर रहकर शिक्षा, खेल और सकारात्मक कामों में अपनी ऊर्जा लगानी चाहिए।”

हस्ताक्षर अभियान से मजबूत हुआ संकल्प

इस मौके पर एक विशेष हस्ताक्षर अभियान भी चलाया गया। जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से लेकर आम जनता और बच्चों ने इस पर साइन करके नशामुक्त समाज बनाने के अपने संकल्प को और मजबूत किया।

17 दिनों तक चला जागरूकता का महाअभियान

आपको बता दें कि झारखंड सरकार के निर्देश पर यह राज्यव्यापी अभियान 10 जून से 26 जून तक पूरे जिले में जोर-शोर से चलाया गया। इन 17 दिनों के भीतर:

  • जिले के अलग-अलग स्कूलों, कॉलेजों और पंचायतों में रैलियां निकाली गईं।
  • नुक्कड़ नाटकों और संगोष्ठियों (सेमीनार) के जरिए लोगों को नशे के भयानक दुष्परिणामों के बारे में समझाया गया।
  • शहरी इलाकों से लेकर सुदूर गांवों तक लोगों को जागरूक किया गया।

आगे की राह: जिला प्रशासन ने साफ किया है कि भले ही इस विशेष अभियान का समापन हो गया हो, लेकिन नशे के खिलाफ यह जंग रुकने वाली नहीं है। समाज को सुरक्षित और स्वस्थ रखने के लिए भविष्य में भी ऐसे जागरूकता कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जाते रहेंगे।

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