झारखंड की आर्थिक रफ्तार पर लगा ब्रेक विकास दर 7% से गिरकर 5.96% पर आई I
राज्य के आर्थिक सर्वेक्षण 2026-27 में खुलासा खनन और औद्योगिक क्षेत्र में सुस्ती को माना जा रहा है प्रमुख कारण। झारखंड सरकार द्वारा जारी आर्थिक सर्वेक्षण 2026-27 ने राज्य की आर्थिक सेहत को लेकर एक चिंताजनक तस्वीर पेश की है। सर्वेक्षण के अनुसार, जो राज्य कभी लगभग 7 प्रतिशत की मज़बूत विकास दर के साथ आगे बढ़ रहा था, वह अब 5.96 प्रतिशत की धीमी रफ्तार पर आ गया है। यह गिरावट भले ही संख्याओं में छोटी लगे, लेकिन नीति-निर्माताओं और अर्थशास्त्रियों के लिए यह एक गंभीर संकेत है।
क्या कहता है आर्थिक सर्वेक्षण?
राज्य सरकार के इस आधिकारिक दस्तावेज़ में स्वीकार किया गया है कि वित्त वर्ष 2026-27 में झारखंड की सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) वृद्धि दर में उल्लेखनीय मंदी दर्ज की गई है। पिछले वर्षों में राज्य की विकास दर राष्ट्रीय औसत के करीब या उससे ऊपर बनी रहती थी, लेकिन इस बार यह आँकड़ा पिछले अनुमानों से काफी नीचे रहा।https://www.facebook.com/jamshedpurmirror/
गिरावट की वजह क्या है?
विशेषज्ञों के अनुसार इस आर्थिक सुस्ती के पीछे कई कारण जिम्मेदार माने जा रहे हैं
खनन क्षेत्र में सुस्ती: झारखंड की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले खनन और खनिज उद्योग में उत्पादन दबाव के संकेत मिले हैं। राज्य के कुल राजस्व में इस क्षेत्र की बड़ी हिस्सेदारी होने के कारण इसमें किसी भी सुस्ती का सीधा असर समग्र विकास दर पर पड़ता है।
औद्योगिक निवेश की धीमी रफ्तार: नए औद्योगिक निवेश और परियोजनाओं के क्रियान्वयन में देरी भी इस गिरावट का एक प्रमुख कारण बताई जा रही है।
वैश्विक और राष्ट्रीय दबाव: देश और दुनिया में आर्थिक अनिश्चितता का असर भी झारखंड जैसे खनिज-आधारित राज्यों पर अपेक्षाकृत अधिक पड़ता है।

तुलनात्मक नज़रिया
| वित्त वर्ष | अनुमानित विकास दर |
|---|---|
| 2024-25 / 2025-26 | ~7.00% |
| 2026-27 | ~5.96% |
| गिरावट | ~1.04 प्रतिशत अंक |
यह गिरावट लगभग एक प्रतिशत अंक की है जो राज्य की वार्षिक विकास योजनाओं और रोज़गार सृजन के लक्ष्यों पर सीधा असर डाल सकती है।
सरकार और विशेषज्ञों की राय
“विकास दर में यह अस्थायी मंदी चिंताजनक ज़रूर है, लेकिन सही नीतिगत हस्तक्षेप से इसे पटरी पर लाया जा सकता है।”
आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्य सरकार को खनन क्षेत्र के अलावा कृषि, पर्यटन और MSME जैसे क्षेत्रों में विविधता लानी होगी, ताकि एकल क्षेत्र पर अत्यधिक निर्भरता कम हो और विकास दर को फिर से ऊपर लाया जा सके।
आगे की राह
झारखंड सरकार के लिए यह सर्वेक्षण एक नीतिगत चेतावनी की तरह है। राज्य में बुनियादी ढाँचे के विकास, डिजिटल अर्थव्यवस्था और कौशल विकास में तेज़ी लाकर इस गिरावट को थामा जा सकता है। विशेषज्ञ उम्मीद जताते हैं कि आगामी वित्त वर्ष में सही कदम उठाए जाने पर झारखंड अपनी पुरानी विकास रफ्तार को वापस पा सकता है।










