
बिजनौर। उत्तर प्रदेश के बिजनौर से सामने आया एक मामला पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। कथित तौर पर मां और बहन के साथ हुए अत्याचार तथा समय पर न्याय नहीं मिलने की पीड़ा ने एक 12 वर्षीय बच्चे को ऐसा कदम उठाने पर मजबूर कर दिया, जिसने समाज और व्यवस्था दोनों के सामने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यह घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था की संवेदनशीलता और तत्परता पर भी सवाल उठाती है। यदि मामले की समय पर निष्पक्ष जांच होती और पीड़ित परिवार को शीघ्र न्याय मिलता, तो शायद हालात इस मोड़ तक नहीं पहुंचते।
इस घटना के बाद देशभर में यह मांग उठ रही है कि हर पीड़ित की शिकायत पर तत्काल और निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी मासूम को न्याय की उम्मीद छोड़कर ऐसा कठोर कदम उठाने की नौबत न आए।
विशेषज्ञों का भी मानना है कि “न्याय में देरी, न्याय से वंचित करने के बराबर हो सकती है।” ऐसे मामलों में संवेदनशील जांच, त्वरित कार्रवाई और पीड़ित परिवार को समय पर न्याय देना ही भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने का सबसे प्रभावी उपाय हो सकता है।







