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रूस से तेल आयात जारी, भारत के लिए अब भी महत्वपूर्ण ऊर्जा साझेदार

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नई दिल्ली: वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों और पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद भारत और रूस के बीच कच्चे तेल का व्यापार 2026 में भी जारी है। रूस वर्तमान में भारत के प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है और भारतीय ऊर्जा सुरक्षा में उसकी भूमिका महत्वपूर्ण बनी हुई है।

रूस बना हुआ है प्रमुख आपूर्तिकर्ता

2022 में यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों द्वारा रूस पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों के चलते रूसी तेल को वैश्विक बाजार में रियायती दरों पर बेचा जाने लगा। इसी का लाभ उठाते हुए भारत ने रूसी कच्चे तेल का आयात बढ़ाया।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 2025 में भारत के कुल कच्चे तेल आयात का लगभग 33 प्रतिशत हिस्सा रूस से आया, हालांकि यह हिस्सा पिछले वर्षों की तुलना में थोड़ा कम रहा।

2026 की शुरुआत में आयात की स्थिति

2026 की शुरुआत में भारत ने रूस से प्रतिदिन लगभग 10 से 12 लाख बैरल (1.0–1.2 मिलियन बैरल प्रति दिन) कच्चा तेल आयात किया।
जनवरी 2026 में कुछ समय के लिए यह आयात घटकर करीब 11 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया था, जिसे वैश्विक बाजार की परिस्थितियों और प्रतिबंधों के प्रभाव से जोड़कर देखा जा रहा है।

रिफाइनरियों ने अस्थायी रूप से घटाई खरीद

2026 की शुरुआत में अमेरिकी प्रतिबंधों और संभावित टैरिफ दबाव के चलते कुछ भारतीय तेल रिफाइनरियों ने रूसी कच्चे तेल की खरीद अस्थायी रूप से कम कर दी थी। हालांकि बाद में स्थिति सामान्य हुई और कई कंपनियों ने दोबारा रूसी तेल खरीदना शुरू कर दिया।

रियायती कीमतें बनी प्रमुख वजह

रूस भारत को कच्चा तेल अंतरराष्ट्रीय बाजार की तुलना में लगभग 10 से 13 डॉलर प्रति बैरल कम कीमत पर उपलब्ध करा रहा है। यही रियायती दरें भारत द्वारा रूसी तेल आयात जारी रखने का एक प्रमुख कारण मानी जा रही हैं।

मार्च 2026 के हालिया घटनाक्रम

हाल के महीनों में मध्य पूर्व क्षेत्र में बढ़ते तनाव और संभावित सप्लाई जोखिमों को देखते हुए भारत ने अपने तट के पास टैंकरों में संग्रहीत रूसी तेल का उपयोग करना शुरू किया है।
इसके साथ ही संकेत मिले हैं कि यदि खाड़ी क्षेत्र से तेल आपूर्ति प्रभावित होती है तो रूस भारत को अतिरिक्त मात्रा में कच्चा तेल भेजने के लिए तैयार है।

इस बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर रखने के उद्देश्य से अमेरिका ने भारतीय कंपनियों को सीमित अवधि के लिए रूसी तेल खरीदने की 30 दिनों की अस्थायी छूट भी प्रदान की है।

भारत का आधिकारिक रुख

भारत सरकार का कहना है कि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए तेल आयात से जुड़े निर्णय लेता है। सरकार के अनुसार ऊर्जा आयात भारत की “रणनीतिक स्वायत्तता” (Strategic Autonomy) का हिस्सा है।

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