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धनबाद में बड़ा भूचाल! DC-SP समेत कई अफसरों पर गिरेगी गाज — कोल माफिया से सेटिंग का पर्दाफाश, IAS-IPS की संपत्ति जांच शुरू

धनबाद। क्या कोयला तस्करी बिना अफसरों की मेहरबानी के चल सकती थी?
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धनबाद। क्या कोयला तस्करी बिना अफसरों की मेहरबानी के चल सकती थी?

धनबाद में सामने आ रही ताजा कार्रवाई ने इसी सवाल को सबसे आगे ला दिया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED), केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और आयकर विभाग की संयुक्त जांच से जिले में वर्षों से सक्रिय कोयला तस्करी नेटवर्क के पीछे प्रशासनिक संरक्षण की परतें खुलने लगी हैं। सूत्रों के अनुसार, वर्ष 2015 के आसपास धनबाद में तैनात रहे कई वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की भूमिका अब जांच एजेंसियों के घेरे में है। सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ तस्करों का खेल था, या सत्ता और सिस्टम की मिलीभगत से पूरा नेटवर्क फलता-फूलता रहा?https://www.instagram.com/the_wedfiles_studio/

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जांच एजेंसियों ने उस दौर के तत्कालीन उपायुक्त (डीसी), पुलिस अधीक्षक (एसपी) समेत कई बड़े अधिकारियों की संपत्तियों, आय के स्रोतों और लेन-देन की गहन पड़ताल शुरू कर दी है। लंबे समय से यह आरोप लगता रहा है कि कोयला तस्करी बिना प्रशासनिक संरक्षण के संभव ही नहीं है। अब जब एजेंसियां सीधे अफसरों के बैंक खातों, अचल संपत्तियों और डिजिटल रिकॉर्ड खंगाल रही हैं, तो सवाल उठ रहा है—क्या वर्षों तक जिले में खुलेआम चल रही तस्करी पर जानबूझकर आंखें मूंदी गईं?

इस पूरे मामले में धनबाद के पूर्व वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) संजीव कुमार का नाम सामने आना कई सवाल खड़े कर रहा है। जांच एजेंसियों का दावा है कि वह केवल लापरवाह नहीं थे, बल्कि कथित तौर पर उनके संरक्षण में कोयला तस्करी का संगठित नेटवर्क संचालित होता रहा। अगर यह आरोप सही हैं, तो यह प्रशासनिक व्यवस्था पर सीधा हमला है। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या राज्य सरकार को अंधेरे में रखकर इस अवैध कारोबार को जानबूझकर लंबे समय तक पनपने दिया गया?

संजीव कुमार के अलावा अमर पांडेय समेत कई डीएसपी, थाना प्रभारी और तत्कालीन इंस्पेक्टरों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। तत्कालीन इंस्पेक्टर रंधीर सिंह सहित कई अधिकारियों पर भी एजेंसियों की नजर है। सूत्र बताते हैं कि आने वाले दिनों में पूछताछ और छापेमारी का दायरा और बढ़ सकता है। इससे यह सवाल और गहरा होता जा रहा है कि आखिर जिले की कानून-व्यवस्था के जिम्मेदार लोग खुद जांच के घेरे में क्यों आ रहे हैं?

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छापेमारी के दौरान कोयला तस्करों से जुड़े कई ठिकानों से महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल डेटा, लेन-देन से जुड़ी फाइलें और डायरियां बरामद की गई हैं। इन साक्ष्यों में कथित तौर पर अधिकारियों और तस्करों के बीच संपर्क, पैसों के लेन-देन और नेटवर्क संचालन के संकेत मिले हैं। अब सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ कुछ व्यक्तियों की करतूत थी, या इसके पीछे एक संगठित और सुनियोजित सिस्टम काम कर रहा था?

सूत्रों के मुताबिक, कोयला तस्करी की कमर तोड़ने के लिए केंद्र सरकार पहले ही उच्चस्तरीय बैठकें कर चुकी है। बताया जा रहा है कि ED की इस कार्रवाई की निगरानी खुद केंद्रीय गृह सचिव स्तर से की जा रही है। इससे मामले की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। लेकिन बड़ा सवाल यही है—क्या यह जांच सिर्फ दिखावे तक सीमित रहेगी, या सच में बड़े चेहरों तक पहुंचेगी?

धनबाद में हुई यह कार्रवाई सिर्फ तस्करों के खिलाफ नहीं, बल्कि पूरे प्रशासनिक ढांचे की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रही है। क्या अब उन अफसरों की भी जवाबदेही तय होगी, जिनकी जिम्मेदारी कानून व्यवस्था और जनता की सुरक्षा थी? आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासों की संभावना जताई जा रही है, जिससे न सिर्फ झारखंड की राजनीति, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र में भूचाल आ सकता है। सवाल यह है—क्या सिस्टम खुद अपने भीतर की सच्चाई सामने लाने के लिए तैयार है, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?

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धनबाद में बड़ा खुलासा! कोल माफिया और अफसरों की मिलीभगत सामने आने के बाद DC-SP समेत कई अधिकारियों की संपत्ति जांच शुरू हो गई है। जल्द कई IAS-IPS कार्रवाई की जद में आ सकते हैं।

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