Commercial Gas की किल्लत, छोटे-बड़े व्यापार पर भारी असर
होटल, रेस्तराँ और उद्योग गैस के लिए तरस रहे हैं हज़ारों कामगारों की आजीविका और भोजन व्यवस्था खतरे में
झारखंड में एक नया और गंभीर संकट दस्तक दे चुका है। राज्य में 19 किलोग्राम के कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति फिलहाल प्रतिबंधित या पूरी तरह बंद कर दी गई है। यह वही सिलेंडर है जो राज्य के होटलों, रेस्तराँओं, ढाबों, कैटरिंग सेवाओं और औद्योगिक कैंटीनों की रसोई को जीवंत रखता है। इस अचानक आई आपूर्ति बाधा ने झारखंड के खाद्य सेवा और विनिर्माण क्षेत्र को एक ऐसे संकट में धकेल दिया है जिसका असर न केवल व्यवसायों पर, बल्कि हज़ारों आम कामगारों और उनके परिवारों पर भी पड़ रहा है।https://jamshedpurmirror.com/artists-from-all-over-the-country-celebrated-the-third-day-of-natya-dance-festival-in-giridih
जो स्थिति कुछ दिन पहले एक सामान्य आपूर्ति व्यवधान लग रही थी, वह अब एक पूर्ण और बहुआयामी संकट का रूप ले चुकी है जिसकी जड़ें राज्य की सीमाओं से कहीं बाहर, पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक तनावों में जाकर मिलती हैं।
क्या है पूरा मामला?
राज्य सरकार की समीक्षा और ज़मीनी रिपोर्टों के अनुसार झारखंड में कमर्शियल एलपीजी का आवंटन सामान्य स्तर के 80 प्रतिशत से घटाकर मात्र 20 प्रतिशत कर दिया गया है। इस चार-पाँचवें हिस्से की कटौती ने राज्य में प्रति माह 1,800 मीट्रिक टन से अधिक की कमी पैदा कर दी है। अधिकारियों ने डीलरों को निर्देश दिया है कि वे उपलब्ध गैस केवल अस्पतालों, स्कूलों और अन्य आवश्यक संस्थाओं तक सीमित रखें जबकि होटल, रेस्तराँ और कारखाने लगभग पूरी तरह आपूर्ति से वंचित कर दिए गए हैं।
माँग का विस्फोट वितरण तंत्र की कमर टूटी
इस संकट को और भी जटिल बनाने वाला एक तथ्य यह है कि आपूर्ति घटने के साथ-साथ माँग अभूतपूर्व रूप से बढ़ गई है। जो दैनिक बुकिंग सामान्यतः 350 से 400 सिलेंडर के बीच रहती थी, वह अचानक बढ़कर 2,300 प्रतिदिन से अधिक हो गई यानी छह गुना से भी ज़्यादा की वृद्धि। यह उछाल आपूर्ति प्रतिबंधों की घोषणा के बाद उपजी घबराहट की खरीदारी का परिणाम है जहाँ हर व्यवसाय अपना भंडार जमा करने की होड़ में लग गया।
इस दोहरी मार एक तरफ आपूर्ति में भारी कटौती और दूसरी तरफ माँग में विस्फोटक वृद्धि ने स्थानीय वितरण नेटवर्क को पूरी तरह पंगु बना दिया है। डीलर, वितरक और लॉजिस्टिक्स ऑपरेटर इस भार को उठाने में सर्वथा असमर्थ हो गए हैं।
संकट की असली वजह वैश्विक उथल-पुथल का स्थानीय असर
इस संकट के पीछे कोई एक कारण नहीं, बल्कि कई परस्पर जुड़े कारण एक साथ काम कर रहे हैं
पश्चिम एशिया में संघर्ष: इस संकट की मूल वजह पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव है, जिसने भारत की एलपीजी आयात पाइपलाइनों को बुरी तरह प्रभावित किया है। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर बढ़ते दबाव के साथ केंद्र सरकार को कठिन प्राथमिकता के फैसले लेने पड़े हैं।
आवश्यक वस्तु अधिनियम का प्रयोग: केंद्र सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत डीलरों को घरेलू उपभोक्ताओं और आवश्यक सेवाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का निर्देश दिया है। इस नीतिगत निर्णय का सबसे भारी बोझ झारखंड के कमर्शियल क्षेत्र को उठाना पड़ रहा है।
घबराहट की खरीदारी: जैसे ही प्रतिबंध की खबर फैली, व्यवसायों में भंडारण की होड़ मच गई जिसने पहले से कमज़ोर पड़ी आपूर्ति को और निचोड़ दिया और एक ऐसा दुष्चक्र पैदा किया जो खुद-ब-खुद बढ़ता जा रहा है।https://jamshedpurmirror.com/india-gets-permission-to-send-ships-of-lpg-from-iran-know-the-whole-thing/
किसे राहत, किसे तकलीफ?
अधिकारियों ने एक स्पष्ट विभाजन रेखा खींची है। अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थाओं और अन्य महत्वपूर्ण सुविधाओं को आपूर्ति प्रतिबंधों से छूट दी गई है उनकी पाइपलाइन, भले ही दबाव में हो, खुली है।
लेकिन रेस्तराँ, होटल, ढाबे, कैटरिंग सेवाएँ और औद्योगिक कैंटीनें लगभग पूरी तरह आपूर्ति से वंचित हो गई हैं और उन्हें न बहाली की कोई समयसीमा बताई गई है, न कोई अंतरिम राहत दी गई है।
“हम कोई विशेष सुविधा नहीं माँग रहे बस इतना चाहते हैं कि चूल्हा जले और हम अपने कामगारों को खाना खिला सकें। गैस के बिना काम करना असंभव है।” रांची के एक रेस्तराँ मालिक, नाम न बताने की शर्त पर
उद्योग और श्रमिक दोहरी मार
इस संकट का असर केवल व्यावसायिक नुकसान तक सीमित नहीं है। Usha Martin Limited जैसे बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठानों की कैंटीनें अपने कामगारों को नियमित भोजन उपलब्ध कराने में असमर्थ हो गई हैं। काम की पाली के दौरान भोजन न मिलना श्रमिकों की उत्पादकता और स्वास्थ्य दोनों को प्रभावित करता है और इसका सीधा असर कारखाने के उत्पादन पर पड़ता है।
इसके साथ ही, झारखंड के कई होटल और रेस्तराँ अनुबंध के तहत अस्पतालों और स्कूलों को पका हुआ भोजन पहुँचाते हैं। उनके बंद होने से उन्हीं आवश्यक संस्थाओं की भोजन आपूर्ति भी खतरे में पड़ सकती है जिन्हें सरकार ने संरक्षित रखने की कोशिश की है।
समाधान की राह सरकार की ज़िम्मेदारी
झारखंड के खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री इरफान अंसारी ने केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी को पत्र लिखकर कमर्शियल एलपीजी की तत्काल बहाली की माँग की है। विशेषज्ञों का मानना है कि एक संतुलित आपातकालीन आवंटन जो घरेलू और अस्पताल आपूर्ति से समझौता किए बिना व्यावसायिक क्षेत्र को आंशिक राहत दे इस स्थिति को स्थिर करने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
समय रहते यदि केंद्र ने ठोस कदम नहीं उठाए, तो झारखंड के होटल, रेस्तराँ और उद्योगों को हुई क्षति की भरपाई में महीनों लग सकते हैं और हज़ारों कामगारों की आजीविका पर इसका गहरा और दीर्घकालिक असर पड़ सकता है।
फिलहाल झारखंड प्रतीक्षा में है रसोइयाँ ठंडी हैं, चूल्हे बुझे हैं और भविष्य अनिश्चित है।https://jamshedpurmirror.com/









